लखनऊ, अरविन्द विद्रोही ।। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के सम्मुख समस्याओं का विशाल अम्बार, जखीरा लगा हुआ है । उप्र विधानसभा 2017 आम चुनाव के चन्द महीनों पहले समाजवादी पार्टी परिवार में उपजे असन्तोष और आपसी जंग का नतीजा चुनावी पराजय के रूप में सभी के सामने आ ही गया। विकास कार्यों की भरपूर चर्चा के बावजूद उप्र के युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव राजनैतिक दुरभिसंधियों का शिकार हुए और समाजवादी पार्टी के संगठन पर तो वे काबिज हो गए लेकिन जनता की अदालत में आपसी द्वन्द का सन्देश - संकेत गलत ही गया परिणामस्वरूप सपा के मात्र 47 विधायक ही विजयी हुए ।
मैंने चुनाव परिणाम आने के तत्काल पश्चात् लिखे लेखों में भी यह वर्णित किया था कि प्रतिकूल हालातों में भी जीते विधायकों को संगठन विस्तार की जिम्मेदारी देना उचित होगा । निश्चित तौर पर ये जो 47 विधायक सपा की साइकिल की सवारी से 2017 के चुनाव में लखनऊ विधानसभा के भीतर प्रविष्ट हुए हैं इनका अपना भी जनाधार है ,ये व्यवहार कुशल हैं एवं आमजनता - पार्टी कार्यकर्ताओं को कैसे खुद से जोड़े रखना है यह इन 47 विधायकों को भली भाँति आता है । विपरीत राजनैतिक हालात होने के कारण आम जनता में लोकप्रिय रहे कुछ विधायक - चन्द मंत्री भी चुनाव हारे । बसपा द्वारा जानबूझ कर सपा के चन्द दिग्गज मंत्रियों के सामने उनका स्वजातीय या मुस्लिम प्रत्याशी उतारा गया जिससे नतीजा भारतीय जनता पार्टी उम्मीदवारों के पक्ष में गया ।
सपा मुखिया अखिलेश यादव 2017 विधानसभा चुनाव पूर्व के राजनैतिक संकट से भी अधिक राजनैतिक संकट ,दुरभिसंधियों ,षड्यंत्रों के दौर से गुजर रहे हैं । यूँ तो प्रत्येक राजनेता का सम्पूर्ण जीवन ही राजनैतिक दाँव पेंच में गुजरता है लेकिन उप्र के युवा मुख्यमंत्री रहे अखिलेश यादव के सम्मुख अपनी विकास परक ,सौम्य ,सरल लेकिन दृढ़ निश्चयी छवि को बरक़रार रखने की चुनौती है । भारी अकूत बहुमत वाली भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सम्मुख कानून व्यवस्था सुरसा के मुख की भाँति मौजूद है ।
इन दिनों एक सुलझे हुए राजनेता के माफिक अखिलेश यादव अपने शासनकाल के विकास कार्यों का पुनः स्मरण आम जन और समर्थकों - कार्यकर्ताओं को सोशल मीडिया - मीडिया के माध्यम से कराते रहते हैं । योगी सरकार में बद से बदतर होती जा रही कानून व्यवस्था से सम्बंधित खबरों ,कार्टूनों,पोस्ट्स को अखिलेश यादव सोशल मीडिया पर साझा करते नजर आते हैं । नेतृत्व संकेत एवं सन्देश देता है और वक़्त आने पर स्पष्ट निर्देश भी । बीते दिन समाजवादी पार्टी का प्रतिनिधिमण्डल उप्र के राज्यपाल महोदय से मिला और उनको उप्र की बिगड़ी कानून व्यवस्था से सम्बंधित माँग पत्र सौंपा । समाजवादी पार्टी नेतृत्व ने कल अपना रुख और निर्देश पूर्ण रूप से स्पष्ट कर दिया है । समाजवादी पार्टी आपराधिक घटनाओं के खिलाफ है ,न्यायिक व्यवस्था पर यकीन करती है ,दोषियों को दंड मिले और निर्दोष बेवजह दंड के भागीदार न बनने पाये ऐसी मानवीय एवं लोकतान्त्रिक सोच की पक्षधर - पैरोकार है ।
समाजवादी मूल्यों विचारों के पक्षधर व्यक्ति ,संगठन कभी भी जातीय विद्वेष के आधार पर न्याय की मांग नहीं कर सकते और मूल्यों - विचारों की इस समाजवादी - न्यायिक- संवैधानिक कसौटी पर समाजवादी पार्टी मुखिया अखिलेश यादव और उनकी पार्टी खरी उतरी है । कल सपा के मुख्य प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधिमण्डल द्वारा राज्यपाल महोदय को सौंपा गया मांग पत्र समाजवादी पार्टी के नेताओं - कार्यकर्ताओं - समर्थकों को भी अवश्य पढ़ना चाहिए ।
राजनीति एक दिन का खेल या मनोरंजन तो है नही यह तो एक सतत् प्रक्रिया है । संगठन कार्य सर्वाधिक महत्वपूर्ण परन्तु दुष्कर कार्य होता है वो भी तब जब आप अंतर्द्वंद से गुजर रहे हों , षड्यंत्रकारी गिद्ध दृष्टि लगाये हुए षड्यंत्र रच रहे हों और आपके सम्मुख चुनौती यह भी हो कि पुनः जनविश्वास अर्जित करना है । बतौर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के तमाम विकास कार्यों के बावजूद ,तमाम दावों इरादों के बावजूद चुनावी समर में सपा क्यों परास्त हुई थी यह तथ्य अब सपा मुखिया अखिलेश यादव को शत् प्रतिशत समझ में आ गया है । समर्थकों - कार्यकर्ताओं- शुभचिंतको को एक बात का ध्यान अवश्य रखना चाहिए कि यह आवश्यक नही होता कि आपका नेतृत्व अपनी प्रत्येक राजनैतिक कोशिश , राजनैतिक योजना को समय से पूर्व सार्वजनिक साझा करे ।खेल हो या राजनीति -- कोई भी कप्तान ऐसे किसी खिलाडी को टीम में नही रखना चाहता जिसकी गलतियों के कारण टीम मैच हारी हो लेकिन कप्तान के सम्मुख यह भी यक्ष प्रश्न रहता है कि पहले उस खिलाडी का स्थान लेने वाला खिलाडी अपना प्रदर्शन तो दिखाए । और हाँ खिलाडी के अच्छे प्रदर्शन के साथ साथ टीम और टीम के कप्तान के प्रति उसके मन में , आचरण में विश्वास होना सर्वाधिक बड़ी योग्यता मानी जाती है ।
समाजवादी पार्टी मुखिया अखिलेश यादव ने पिछले दिनों संगठन स्तर पर लोगों को जिम्मेदारी सौंपी थी । यकीनन अति शीघ्र समाजवादी पार्टी के मुखिया संगठन स्तर पर व्यापक फेरबदल भी करेंगे । संग़ठन के विस्तार कार्यक्रमों की कड़ी में सदस्यता अभियान पश्चात जनजुड़ाव हेतु तमाम कार्यक्रमों के आयोजन के निर्देश भी जारी होंगे । समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं को खासकर युवाओं को जो कि सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते हैं उनको अनर्गल प्रलाप ,जातीय विद्वेष युक्त चर्चा और बेवजह के सवाल करने वालों से बहस करने ,उनके विषय मे चर्चा करके अपनी ऊर्जा व्यर्थ नही करनी चाहिए । समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं - समर्थकों के लिए यही बेहतर है कि अपने संग़ठन के नेतृत्व के निर्देशों का पालन करें ।
पुनः राजनीति एक दिन का खेल या मनोरंजन नही है यह सतत प्रक्रिया है ।
..................................................
अंत में ,अगर आप फ़िल्म जगत में रूचि रखते हैं तो पढ़िए www.p4peoplearts.com पर फ़िल्म जगत से जुडी खबरें --- अरविन्द विद्रोही

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें