AMJA BHARAT एक वेब न्‍यूज चैनल है जिसे कम्‍प्‍यूटर, लैपटाप, इन्‍टरनेट टीवी, मोबाइल फोन, टैबलेट इत्‍यादी पर देखा जा सकता है। पर्यावरण सुरक्षा के लिये कागज़ बचायें, समाचार वेब मीडिया पर पढें

शुक्रवार, 3 अगस्त 2018

लगातार बारिश से गंदगी व जलभराव से लोग हो रहे परेशान

फतेहपुर, शमशाद खान । लगातार एक सप्ताह से हो रही बारिश के चलते धूप के दर्शन भी लोगों को दूर्लभ हो गये हैं। बिेगड़े मौशम की वजह से पूरे समय रिमझिम बारिश और बदली छायी रहने के साथ नमी अब लोगों को अखरने लगी है। रूक-रूक कर कभी रिमझिम तो कभी तेज बारिश अब लोगों को रूला रही है। धून न निकलने से लोगों को रोजमर्रा के काम निपटने में भी राम से काम पड़ रहा है। वहीं गंदगी और जलभराव ने लोगों का जीना दूभर कर दिया है। समस्या को लेकर नगर पालिका तनिक भी गंभीर नही है और लोगों को उनके हाल पर मरने के लिये छोड़ दिया है। जिस घटिया तरीके से नाले-नालियों की सफाई करायी गयी उसका नतीजा अब सबके सामने है। पालिका प्रशासन द्वारा सफाई व्यवस्था को लेकर दावे तो बड़े-बड़े किये गये लेकिन परिणाम जस का तस रहा। हर बार की तरह इस बार भी लोगों को भीषण जलभराव की दिक्कतों से जूझना पड़ रहा है। सब कुछ बदला लेकिन अगर कुछ नही बदला तो पालिका प्रशासन का ढर्रा और सफाई व्यवस्था। पिछले दो दशक से बारिश के दौरान जिस तरह से जलभराव की समस्या विकराल हो जाती है उससे भी सबक लेना पालिका बोर्ड मुनासिब नही समझता। लम्बे अर्से से नाला सफाई के नाम पर जो खेल खेला जाता रहा वह परम्परा बनी हुयी है। नाले-नालियों की सफाई जिस तरह से करायी गयी उसका परिणाम पूरे शहर में हो रहे चैतरफा जलभराव का नजारा स्वयं बयां कर रहा है। कोई भी मोहल्ला और वार्ड इस समस्या से अछूता नही है। कई वार्डों में तालाबों की पुराई कराकर प्लाटिंग कर दी गयी। नाले भी गायब कर दिये गये। उसी का नतीजा है कि हर साल जलभराव से लोग जूझते तो हैं लेकिन उन्हें समस्या से छुटकारा नही मिलता। अधिकांश सभासद भी खाऊ कमाऊ खेल मे शामिल होकर मौज मारते हैं। मुराइन टोला, सिविल लाइन, आवास विकास, आबूनगर, झाऊपुर, हरिहरगंज, पीरनपुर, मसवानी, सैयदवाड़ा, खेलदार, पाटी गली, बाकरगंज, तुराबअली का पुरवा, देवीगंज, राधानगर आदि तमाम क्षेत्रों मे जलभराव की दिक्कत बनी हुयी है। साल मे सिर्फ एक बार सिल्ट सफाई की कवायद खुद बयां करती है कि पालिका प्रशासन समस्या को लेकर कितना गंभीर है। लाखों रूपये सिल्ट सफाई के नाम पर इस बार भी बहा दिये गये लेकिन नतीजा शून्य रहा। हालात वही, व्यवस्थाएं वही अगर कुछ बदला तो कई सभासदों की माली हालत। जो भी बोर्ड मे शामिल हुआ उसने अपना मकसद सिर्फ कमाई पर लगाया। जनसेवा की आड़ मे जमकर मेवा खायी और खाकपति से कोई लखपति तो कोई करोड़पति बन बैठा। पैदल चलने वाले बाइक से तो बाइक से चलने वाले आज चार पहिया लग्जरी गाड़ियों से चल रहे हैं। कई ऐसे रहे जिन्होनें अपने वार्डों मे जो भी निर्माण कार्य कराये उसमे अपना ठेकेदार रखा और जमकर कमीशन लिया। सड़क के ऊपर सड़क बना दी और जो मलबा निकला भी तो उसे बेच डाला। सफेद कुर्ताधारी इन जनसेवकों के स्याह चेहरे किसी से छिपे नही है। 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Advertisement

Advertisement

लोकप्रिय पोस्ट