जिसने,मान बढ़ाया विश्व पटल पर।
हमें नाज़ है हमारे उस 'अटल' पर।।
युद्ध उसकी कभी नीति नही थी।
बात जब तलक बीती नही थी।।
पड़ोसी पार कर चुके थे सीमा।
क़दम उसका था कुछ धीमा।
धीमे कदम को कमजोरी समझा !
वाह ! पड़ोसी तूने कायर समझा !!
इतना तो याद रखा होता पाकिस्तान !
वीरों से न रहा,रिक्त कभी हिन्दुस्तान !!
उस, वतन से दगाबाजी का खेल खेला !
हारा कारगिल,'अटल' का जब वार झेला !!
जिसने,देश-हित न छोड़ा कल पर !
हमें नाज़ है,हमारे उस 'अटल' पर !!
परदेश में शब्दों का शासन जमाया।
यू एन में उठेसिर हिंदीभाषण सुनाया।
कवि,नेता,वक्ता और मंझा पत्रकार !
मानवीय तस्वीरों का था वो चित्रकार।
जिसने पहुँचाई हिंदी विश्व पटल पर।
हमें नाज़ है हमारे उस अटल पर।।
कर 5 परमाणु पोखरण में परीक्षण।
मिले दुनिया में हमें बेहद गर्वीले क्षण।
सीना चौड़ा है,हां उसी के बल पर।
हमें नाज़ है,हमारे उस 'अटल' पर।
हमें नाज़ है,हमारे उस 'अटल' पर।
गौरव श्रीवास्तव 'कोसमा'
हमें नाज़ है हमारे उस 'अटल' पर।।
युद्ध उसकी कभी नीति नही थी।
बात जब तलक बीती नही थी।।
पड़ोसी पार कर चुके थे सीमा।
क़दम उसका था कुछ धीमा।
धीमे कदम को कमजोरी समझा !
वाह ! पड़ोसी तूने कायर समझा !!
इतना तो याद रखा होता पाकिस्तान !
वीरों से न रहा,रिक्त कभी हिन्दुस्तान !!
उस, वतन से दगाबाजी का खेल खेला !
हारा कारगिल,'अटल' का जब वार झेला !!
जिसने,देश-हित न छोड़ा कल पर !
हमें नाज़ है,हमारे उस 'अटल' पर !!
परदेश में शब्दों का शासन जमाया।
यू एन में उठेसिर हिंदीभाषण सुनाया।
कवि,नेता,वक्ता और मंझा पत्रकार !
मानवीय तस्वीरों का था वो चित्रकार।
जिसने पहुँचाई हिंदी विश्व पटल पर।
हमें नाज़ है हमारे उस अटल पर।।
कर 5 परमाणु पोखरण में परीक्षण।
मिले दुनिया में हमें बेहद गर्वीले क्षण।
सीना चौड़ा है,हां उसी के बल पर।
हमें नाज़ है,हमारे उस 'अटल' पर।
हमें नाज़ है,हमारे उस 'अटल' पर।
गौरव श्रीवास्तव 'कोसमा'

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