फतेहपुर, शमशाद खान । भाई-बहनों के प्यार का प्रतीक रक्षा बंधन का पर्व रविवार को परम्परागत ढंग से मनाया गया। बहनों ने भाइयों को रोली-टीका कर उनकी कलाई में राखी बांधी और अपनी रक्षा का वचन लिया। भाइयों ने भी बहनों की रक्षा का संकल्प दोहराया।
हिन्दू रीति रिवाजों में रक्षा बंधन का पर्व खास अहमियत रखता है। रविवार को पर्व के अवसर पर बहनें जहां अपने-अपने भाइयों को राखी बांधने के लिए ब्याकुल दिखीं वहीं धागे के इस अटूट बंधन में बंधने के लिए भाई भी ब्याकुल दिखाई दिये। सुबह से ही राखी बांधने और बंधवाने का सिलसिला शुरू हो गया। जो बहनें घर में थी। उन्होने अपने भाइयों को पहले ही राखी बांध ली और जो ब्यहता हो गयी हैं वह राखी बांधने के लिए ससुराल से बाबुल के घर आयीं और भाइयों को रोली-टीका कर हाथों में रक्षा बंधन के रूप में अपना प्यार बांधकर अपनी रक्षा का वचन लिया। वहीं मुस्लिम समुदाय में भी रक्षा बंधन पर्व के रंग देखने को मिले। मुस्लिम भाइयों को कहीं हिन्दू बहनों ने तो कहीं हिन्दू भाइयों को मुस्लिम बहनों ने रक्षा सूत्र बांधा तो समुदाय के ही परिवारों के बीच रक्षा बंधन का पर्व पूरे उल्लास के साथ मनाया गया। बहने ससुराल से बाबुल के घर आकर भाइयों को राखी बांधी और उनका मुंह मीठा कराया। भाइयों ने बहनों को हर पल दुःख दर्द में साथ देने का वायदा किया।
पूरी परम्परा के तहत यह पर्व शहर सहित ग्रामीणांचलों में हर्षों उल्लास के साथ मनाया गया। बहनों ने भाइयों को तिलक, रोचना लगाया और प्यार के धागे को उनकी कलाई में बांधकर उनका मुंह भी मीठा कराया। भाइयों ने भी बहनों के धागे की सौंगात लेते हुए हर घड़ी दुःख के समय उनके खडे रहने का आश्वासन देते हुए रक्षा का वचन दोहराया। बहनों ने जहां पर्व पर भाइयों की खास मिठाई के साथ खुबसूरत राखी बांधने का खास ख्याल रखा। वहीं भाईयों ने बहनों को मन पसंद उपहार भी दिये। कुछ भाइयों ने नकद धनराशि भी दी। पर्व के मद्देनजर शहर के रेलवे स्टेशन, रोडवेज बस स्टाप व प्राइवेट बस स्टापों में भारी भीड़ रही। कहीं बहनें भाई को राखी बांधने की जल्दी में दिखाई दी तो कहीं भाई राखी बंधवाने की जल्दी में साधन पकडने की होड में रहे। राखी पर्व के चलते विक्रम व ई-रिक्शा वालों की भी चांदी रही। स्टेशन से बस स्टाप व बस स्टाप से स्टेशन एवं बाईपास से विभिन्न स्थानों पर आने-जाने का सिलसिला चलता रहा। मिठाई भी खूब बिकी। सुबह से लेकर शाम तक मिठाई की दुकानों में खरीददारों की लाइन लगी रही। जेल में बन्द कैदियों को राखी बांधने का सिलसिला पूर्व सन्ध्या से ही शुरू हो गया था। रक्षाबन्धन के दिन बड़ी संख्या में बहनों ने जेल पहुंच कर अपने-अपने भाईयों को राखी बांधी। जेल प्रशासन ने रक्षाबन्धन को लेकर बेहतर व्यवस्था की थी।

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