कानपुर नगर, हरिओम गुप्ता - उमस और बारिश के बीच घटते बढते तापमान और वातावरण में नमी के कारण विभिन्न प्रकार के वायरस पनप रहे है जिसके कारण संक्रामक बीमारियों के साथ निमोनिया का खतरा भी बहु ज्यादा बढ गया है। निमोनिया ज्यादातर बैक्टीरिया, वायरस या फंगस के हमले से होता है। मौसम बदलने, सर्दी लगने, फेफडों पर चोट लगने के अलावा खसरा, चिकनपाॅक्स जैसी बीमारियों के बाद भी इसकी आशंका बढ जाती है। टीबी, एचआईवी पाॅजटिव, अस्थमा, उायबिटीज, कैंसर व दिल के रोगियों को निमोनिया होने की आंशका ज्यादा होती है। आम तौर पर बुखार या जुकाम होने के बाद निमोनिया होता है और यह 10 से 12 दिनो में ठीक भी हो जाता है लेकिन कई बार यह खतरनाक हो जाता है।
डाक्टरों की माने तो पांच साल से छोटे बच्चों और 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को अधिक खतरा रहता है, क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। दुनिया ीार में होने वाली बच्चों की मौतो में 20 फीसदी सिर्फ निमोनिया के कारण ही होती है। जिला अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ डा0 संजीव अग्रवाल ने बताया कि निमोनिया में वैक्टीरिया, वायरस या फंगस से फेंफडों में एक तरह का संक्रमण होता है जो फेफडे में लिक्रिड जमा करके खून और आॅक्सीजन के फ्लो में अवरोध पैदा करता है। बीमारी के लक्षण बताते हुए कहा कि निमोनिया में बलगम वाली खांसी, सीने में दर्द, तेज बुखार और सांस तेजी से चलती है। ऐसे लक्षण प्रतीत होते ही लापरवाही न करते हुए तत्काल चिकित्सक का परार्मर्श लेना आवश्यक होता है।

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