कानपुर नगर, हरिओम गुप्ता - गरीबो में वितरित किये जाने वाला अनाज के बारो को गोदामों रखा जाता है लेकिन सरकारी तंत्र की लापरवाही के कारण ऐसे गोदामो की देखरेख ठीक प्रकार से नही की जाती है। नतीजा यह कि बारिश के मौसम में छावनी क्षेत्र में बने माल गोदाम की छत से पानी टपक रहा है और यहां रखा गरीबों का सैकडो बोरे आनाज भीगकर खराब हो रहा है लेकिन प्रशासन इस आर आंखे मूंदे है। दूसरी तरफ विभाग के अधिकारी इस समस्या से अपना पल्ला झाडते नजर आ रहे है।
बतातें चले की हर वर्ष सरकारी माल गोदामों में बारिश के दौरान अनाज खराब होने की समाजचार आते है लेकिन इसके बाद भी विभागयी अधिकारी इस ओर ध्यान नही देते या साफ कहें तो देना नही चाहते क्योंकि गरीबों का अनाज खराब होता है तो उनका क्या जाता है। वहीं बडे अधिकारी सिर्फ अपने केबिन की शोभा बढाते रहते है। मुरे कंपनी पुल के पास स्थित छावनी क्षेत्र में कंट्रोल को भेजे जाने वाले अनाज का भण्डारगृह बना हुआ है जहां सैकडो बोरी अनाज लगा रहता है। इन गोदामों की छतो की सालों से मरम्मत नही हुई है। बडे-बडे रोशनदान में खिडकियां नही लगी है। गोदाम जर्जर होते जा रहे है लेकिन वर्ष दर वर्ष बीतने के बाद भी इनकी मरम्मत का कोई प्रयास नही किया। अब हालत यह है कि यहां चारों को बारिश के दौरान पानी टपकता है। सूत्रों की माने तो बडे जिम्मेदारो ने कभी गोदाम का निरीक्षण तक नही किया। अब बारिश के पानी में गोदाम में रखे अनाज के बोरे भीग गये है जिससे अनाज खराब हो रहा है। वहीं यह भी बताया गया कि यहां अधिकारी केवल वितरण के कार्य में लगे रहते है। किस प्रकार पैसा कमाया जाये इसपर अधिकारियों का ध्यान ज्यादा होता है लेकिन व्यवस्थाओं को ठीक रखने की कोई जिम्मेदारी अधिकारी नही निभाते है। वहंी आरएफसी शेषनाथ का कहना है कि गोदाम मरम्मत के लिए छावनी बोर्ड से परमीशन लेना होता है, लेकिन बात यह है कि इतने सालों से बारिश होने के बाद इस ओर कोई प्रयास क्यों नही किया गया। हर वर्ष इन्ही हालातों का सामना क्यों करना पडता है। आखिर कोई ठोस कदम क्यों नही उठाये जाते या फिर अधिकारी केवल महीने की तनख्वाह और ऊपरी कमाई के ज्यादा सरकारी नौकरी को कुछ नही समझते है।

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